इन ग्रहों के प्रकोप से अहमदाबाद में क्रैश हुआ प्लेन, ज्योतिष ने बताया सच!

अहमदाबाद विमान दुर्घटना: 12 जून 2025 का दिन एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 में यात्रा कर रहे लोगों के लिए बहुत अशुभ साबित हुआ है। अहमदाबाद एयरपोर्ट से टेक ऑफ करते हुए एयर इंडिया का प्लेन अहमदाबाद के मेघानी नगर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस प्लेन में देश-विदेश के 242 नागरिक सवार थे और यह फ्लाइट अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन के लिए रवाना हो रही थी। एस्ट्रोसेज परिवार दुर्घटनाग्रस्त सभी नागरिकों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करता है और ईश्वर से प्रार्थना करता है कि ऐसी दुर्घटना फिर कभी न हो। यहाँ हम आपको ज्योतिष की दृष्टि से उन कारकों के बारे में बताएंगे जो इस विमान हादसे के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। 

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हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब कोई विमान दुर्घटना का शिकार हुआ है। इससे पहले भी अनेक विमान दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ज्योतिषीय ग्रंथों में दुर्घटनाओं के पीछे ख़ासकर बड़ी दुर्घटनाओं के पीछे शनि, मंगल और राहु-केतु जैसे ग्रहों का प्रभाव माना जाता है। यदि हम विमान दुर्घटना की बात करें, तो इस मामले में वायु तत्व के ग्रह और वायु तत्व की राशियां अक्सर शामिल या पीड़ित होती हैं। आइए जानते हैं वायु तत्व की राशियां कौन-कौन सी हैं। 

वायु तत्व की राशियाँ और ग्रह

ज्योतिष में मिथुन, तुला और कुंभ राशि को वायु तत्व की राशि माना जाता है। वहीं, शनि और राहु को वायु तत्व का ग्रह माना गया है जबकि बृहस्पति को आकाश तत्व का ग्रह माना गया है। वायु तत्व की राशियों के अलावा यदि आसमान में आग लगने की घटना होती है, तो उसमें अग्नि तत्व की राशियां और अग्नि तत्व के ग्रह भी शामिल होते हैं। अग्नि तत्व की राशियों की बात करें, तो मेष, सिंह और धनु राशि अग्नि तत्व की राशियां हैं जबकि सूर्य, मंगल और केतु को अग्नि तत्व का ग्रह माना गया है। 

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ऐसे में, जब अग्नि तत्व के ग्रह और राशियों तथा वायु तत्व के ग्रह और राशियों के बीच असंतुलन पैदा होता है। विरोधी ग्रह या विरोधी राशियां एक-दूसरे को पीड़ित करती हैं, तो उस समय इस तरह की विमान दुर्घटनाएं होने का भय अधिक रहता है। 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुई विमान दुर्घटना के पीछे किन ग्रहों का हाथ था? इस बारे में भी हम विस्तार से चर्चा करेंगे। साथ ही, भारत में हुई दो अन्य विमान दुर्घटनाओं की बात करेंगे और यह जानने का प्रयास करेंगे कि इन तीनों दुर्घटनाओं में अग्नि और वायु तत्वों के बीच किस तरह का असंतुलन उत्पन्न हुआ था। चलिए सबसे पहले नज़र डालते हैं 12 जून 2025 को अहमदाबाद की दोपहर 01 बजकर 42 मिनट पर ग्रहों की स्थिति पर। 

अहमदाबाद विमान दुर्घटना का ज्योतिषीय विश्लेषण 

12 जून 2025 की दोपहर लगभग 01 बजकर 42 मिनट के आसपास अहमदाबाद में हुई विमान दुर्घटना के समय चंद्रमा धनु राशि में स्थित था। राहु कुंभ राशि अर्थात वायु तत्व की राशि में स्थित था। शनि जल तत्व की राशि मीन में स्थित होकर दशम दृष्टि से चंद्रमा और अग्नि तत्व की धनु राशि को देख रहा था। मंगल और केतु अग्नि तत्व के ग्रह होकर अग्नि तत्व की राशि में ही स्थित थे।

ऐसे में, राहु-केतु और मंगल ग्रह वायु तथा अग्नि तत्व दोनों राशियों को पीड़ित कर रहे हैं। मंगल पर राहु-केतु के प्रभाव को वैदिक ज्योतिष में अंगारक योग माना गया है जो आग 

लगने की घटनाओं का कारण बनता है। विशेषकर जब इनमें से कोई दो या दो से अधिक ग्रह एक साथ अग्नि या वायु तत्व की राशि में हों अथवा अग्नि तत्व के ग्रहों के साथ हों, तो आगजनी की घटनाएं अधिक होती हैं। इस प्रकार, कल दुर्घटना के समय यह योग बने हुए थे।

शनि की दशम दृष्टि धनु राशि में बैठे हुए चंद्रमा पर थी। यहां चंद्रमा अग्नि तत्व की राशि में उपस्थित था और शनि की दृष्टि चंद्रमा को पीड़ित कर रही थी। अतः आग से संबंधित दुर्घटनाओं के योग बने हुए थे। लेकिन यह विमान दुर्घटना थी इसलिए हमें शुक्र और सूर्य पर पाप ग्रहों और वायु या अग्नि तत्व के प्रभाव को भी देखना होगा। 

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विमान हादसे में सूर्य और शुक्र की भूमिका 

जैसे कि हम जानते हैं कि सूर्य ग्रहों का राजा है और सामान्य तौर पर, यह धनवान या अपने क्षेत्र का मुखिया माना गया है। विमान से यात्रा करने वाले लोग ज्यादातर संपन्न और अपने क्षेत्र के बड़े लोग होते हैं। इस प्रकार, समाज के समृद्ध लोग ही विमान में यात्रा कर सकते हैं। सूर्य और शुक्र की स्थिति देखें तो, सूर्य ग्रह शुक्र की राशि में बैठा हुआ है और शुक्र मंगल की अग्नि तत्व की राशि में बैठा हुआ है। इस प्रकार, इन दोनों के बीच भी आपसी कनेक्शन बना हुआ था और इसके परिणामस्वरूप, अहमदाबाद में विमान दुर्घटना का शिकार हुआ। 

यहां हमें एक विशेष सूत्र मिला है और इस सूत्र को हम बाद में दो अन्य दुर्घटनाओं पर भी लागू करके देखेंगे कि वह उन पर लागू होता है या नहीं। आइए जान लेते हैं इसके बारे में। 

सूर्य ग्रह का शुक्र के साथ संबंध यानी कि सूर्य ग्रह शुक्र के साथ हो अथवा शुक्र की राशि में हो या फिर शुक्र के नक्षत्र में हो। 

इसी तरह शुक्र का संबंध भी अग्नि या वायु तत्व के ग्रह, अग्नि या वायु तत्व ग्रह की राशि से या नक्षत्र से होना चाहिए। 

चंद्रमा की स्थिति भी अग्नि तत्व वाले ग्रह के साथ अथवा अग्नि तत्व वाले ग्रह की राशि में होनी चाहिए या फिर अग्नि तत्व की राशि में होनी चाहिए।

इसके साथ ही चंद्रमा, शनि, मंगल, राहु और केतु के प्रभाव में होना चाहिए। सरल शब्दों में, इनमें से एक या एक से अधिक ग्रह का प्रभाव चंद्रमा पर होना चाहिए। चंद्रमा या तो इन ग्रहों के साथ युति कर रहा हो या फिर इन ग्रहों के द्वारा देखा जा रहा हो। इसमें भी यदि चंद्रमा वायु तत्व की राशि या वायु तत्व वाले ग्रह के साथ हो, तो उस पर अग्नि तत्व वाले ग्रह का प्रभाव होना चाहिए। वहीं, यदि चंद्रमा अग्नि तत्व की राशि में हो, तो वायु तत्व वाले ग्रह का प्रभाव होना चाहिए। 

आइए अब इस दृष्टि से नज़र डालते हैं अन्य दो विमान घटनाओं पर। 

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अहमदाबाद विमान हादसे के समान दो विमान हादसे 

पहली दुर्घटना 

सबसे पहले हम बात करेंगे एलायंस एयर फ्लाइट 7412 की दुर्घटना की, तो बता दें कि यह फ्लाइट 17 जुलाई 2000 के दिन लगभग 07 बजकर 34 मिनट पर पटना में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसकी कुंडली में सूर्य की स्थिति देखें, तो सूर्य शुक्र के साथ युति कर रहा था क्योंकि सूर्य जीरो डिग्री का है। इसका मतलब है कि इससे ठीक पहले सूर्य वायु तत्व की राशि में उपस्थित था और मंगल के साथ युति कर रहा था। इस तरह से वायु तत्व की राशि, अग्नि तत्व के ग्रह मंगल, अग्नि तत्व के ग्रह सूर्य और शुक्र का आपस में कुछ न कुछ संबंध था।

चंद्रमा पर राहु-केतु और सूर्य का प्रभाव था यानी चंद्रमा पर तीन पाप ग्रहों का प्रभाव था। साथ ही, अग्नि तत्व वाले ग्रह मंगल की दृष्टि भी थी। इस प्रकार, दो अग्नि तत्व के ग्रह चंद्रमा को पीड़ित कर रहे थे। यदि केतु को भी अग्नि तत्व का ग्रह मान लें, तो तीन अग्नि तत्व के ग्रह और राहु जैसे वायु तत्व का ग्रह चंद्रमा को पीड़ित कर रहा था। इतना ही नहीं, सूर्य, शुक्र और राहु पर शनि की तीसरी दृष्टि भी थी, इसलिए यहां पर भी किसी बड़ी दुर्घटना के योग बने थे। अब क्योंकि चंद्रमा कुछ देर पहले अग्नि तत्व की राशि में था और इसके बाद पृथ्वी तत्व की राशि में पहुंच गया था। ऐसे में, यह दुर्घटना आसमान के साथ-साथ जमीन पर हुई। 

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दूसरी दुर्घटना

दूसरी बड़ी विमान दुर्घटना 22 मई 2010 को बेंगलुरु एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट IX 812 के साथ हुई थी जो रनवे से आगे बढ़ गई थी जिसकी वजह से वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। आइए अब इस दिन की ग्रह स्थिति पर नज़र डालते हैं। 

इस दिन यानी 22 मई 2010 को सूर्य ग्रह शुक्र की राशि में स्थित थे और शुक्र वायु तत्व की राशि में स्थित थे। शुक्र पर राहु-केतु का प्रभाव था। चंद्रमा अग्नि तत्व की राशि में था और वह मंगल और शनि के मध्य में था। इस प्रकार, ऊपर बताया गया सूत्र यहां भी लागू हो रहा है। सरल शब्दों में कहें तो, जब क्रूर और पाप ग्रह संयुक्त रूप से किसी वायु तत्व की राशि पर प्रभाव डालते हैं या अग्नि इस तत्व वाली राशि पर प्रभाव डालती है, तो इस तरह की दुर्घटनाएं होने की आशंका बढ़ जाती हैं। 

चंद्रमा राहु, केतु और शनि मंगल के साथ हो, इनके द्वारा देखा जा रहा हो या इनके मध्य में हो, तब भी ऐसा होता है। इन योगों की प्रबलता दुर्घटना की आशंका को बढ़ाती है। 12 जून 2025 को इस तरह के अशुभ योग बने हुए थे जहां सूर्य और चंद्रमा दोनों पर शनि की दृष्टि थी। शुक्र, मंगल, केतु और चंद्रमा अग्नि तत्व की राशियों में थे। ऐसे में, महंगा और लक्ज़री से पूर्ण माने जाने वाले विमान पर इस तरह का नकारात्मकता प्रभाव पड़ा। ऐसा कहा जा सकता है कि इस वजह से शायद यह विमान दुर्घटना घटित हुई। 

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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