नवरात्रि के बाद गुरु चांडाल योग का साया- सात महीने इन तीन राशियों के लिए रहेंगे भारी!

नवरात्रि माँ दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित एक ऐसा पावन और शुभ फलदायी त्योहार है जब हम माँ दुर्गा की भक्ति, पूजा, व्रत आदि करते हैं। इस वर्ष नवरात्रि जहां पंचक में प्रारंभ हो रही है वहीं इस दौरान ढेरों ऐसे शुभ योगों का निर्माण भी हो रहा है जो चैत्र नवरात्रि के महत्व को कई गुना बढ़ाने वाला है। 

नवरात्रि 22 मार्च से प्रारंभ होकर 30 मार्च को समाप्त हो जाएगी। नवरात्रि के ठीक 1 महीने बाद गुरु चांडाल योग का निर्माण हो रहा है। गुरु चांडाल योग से आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है, इस योग को अशुभ क्यों कहते हैं, यह किस राशि में बनने वाला है, इत्यादि सारी जानकारी जानने के लिए ये ब्लॉग अंत तक पढ़ें। 

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गुरु चांडाल योग- बेहद अशुभ है यह योग

सबसे पहले बात करें गुरु चांडाल योग की तो इस साल नवरात्रि के ठीक 1 महीने बाद मेष राशि में 2 ग्रहों के साथ आने से गुरु चांडाल योग का निर्माण होगा। दरअसल बृहस्पति यानि गुरु ग्रह 22 अप्रैल को मेष राशि में गोचर करेंगे। यहां पहले से ही राहु मौजूद है। इन दोनों से गुरु चांडाल योग का निर्माण होगा। 

इसके कुछ दिन पहले मीन राशि से निकलकर सूर्य ने भी मेष में प्रवेश किया था। ऐसे में स्वाभाविक है कि ग्रहों का यह संयोजन और यह योग सभी राशियों को प्रभावित अवश्य करेगा।

गुरु चांडाल योग प्रभाव 

ज्योतिष के जानकार मानते हैं कि, जब किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु चांडाल योग का निर्माण होता है तब व्यक्ति की कुंडली में गुरु का प्रभाव कम होने लगता है। दरअसल राहु गुरु के शुभ प्रभाव को कम करता है और ऐसे में व्यक्ति के जीवन में तमाम तरह के नकारात्मक प्रभाव दिखने लगते हैं। जिस व्यक्ति की कुंडली में गुरु चांडाल योग बनता है ऐसे जातक धार्मिक कार्यों में रुचि नहीं रख पाते हैं, ऐसे लोग पाखंड, धोखाधड़ी, गलत काम और झूठ बोलने जैसी कुकर्म में लग जाते हैं।

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यहां यह भी जानना जरूरी है कि जब मेष राशि में गुरु चांडाल योग का निर्माण होगा तो उस दौरान में शनि की दृष्टि भी इस योग पर पड़ने वाली है। ऐसे में इस योग से मिलने वाले परिणाम पर शनि ग्रह का भी प्रकोप देखने को मिल सकता है। जिसके फलस्वरूप बीमारियां बढ़ने की आशंका है। यह स्थिति देश के लिए भी अनुकूल नहीं कही जा सकती है। 

यानि कि कुल मिलाकर देखा जाए तो यह समय बेहद ही दिक्कतों भरा रहने वाला है। एक बार सूर्य जब इस राशि से निकल जाएगा तब स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा।

गुरु चांडाल योग से सावधान रहें ये राशियां 

दरअसल ज्योतिष में कुछ शुभ तो कुछ अशुभ योग बताए गए हैं। इनमें से गुरु चांडाल भी एक ऐसा ही अशुभ योग है। अप्रैल के महीने में गुरु चांडाल योग बनने वाला है। ऐसे में इस दौरान 3 राशियों को विशेष तौर पर सावधान रहने की आवश्यकता पड़ेगी। कौन-कौन सी हैं वह राशियां आइए जान लेते हैं: 

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मेष राशि, मिथुन राशि, और धनु राशि 

मेष राशि: 22 अप्रैल के बाद गुरु चांडाल योग मेष राशि के लग्न भाव में बनेगा। ऐसे में आने वाले 6 महीने आपके लिए बेहद मुश्किलों भरे रहने वाले हैं। इस दौरान आपको अपने कार्य में रुकावट, निराशा, आदि झेलनी पड़ सकती है। इसके अलावा आर्थिक नुकसान होने के भी प्रबल संकेत है। स्वास्थ्य में भी नकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। कुल मिलाकर यह समय आपके लिए ज्यादा अनुकूल नहीं रहने वाला।
मिथुन राशि: दूसरी जिस राशि पर 6 महीने के लिए गुरु चांडाल योग का प्रभाव देखने को मिलेगा वह है राशि चक्र की तीसरी राशि मिथुन राशि। इस दौरान आपको भी ढेरों अशुभ समाचार और बुरी खबरें मिल सकती है। धन हानि और स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां आने की प्रबल आशंका है। इसके अलावा कार्यस्थल पर भी आपको कुछ परेशानियां उठानी पड़ सकती है। जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेने से बचें और धैर्य के साथ काम लें।
धनु राशि: इसके अलावा गुरु चांडाल योग से धनु राशि के जातकों पर भी संकट के बादल लेकर आने वाला है। इस दौरान आप वाहन चलाते वक्त अधिक सावधानी बरतें। व्यापार में घाटा होने की आशंका है। खर्चों में वृद्धि होगी जिससे आपका आर्थिक पक्ष कमजोर रहने वाला है। आपको किसी तरह का कोई अज्ञात भय डरा सकता है। इसके अलावा करियर, नौकरी और व्यापार में भी परेशानियां आने की आशंका है।

गुरु चांडाल योग के उपाय 

इस तरह के नकारात्मक योगों के बारे में सुनकर लोग अक्सर भयभीत हो जाते हैं। हालांकि ज्योतिष में इसके निवारण या दुष्प्रभाव दूर करने के भी उपाय बताए गए हैं। तो आइये जान लेते हैं गुरु चांडाल योग में क्या कुछ उपाय करके आप इस योग से मिलने वाले दुष्प्रभाव को अपने जीवन में कम कर सकते हैं।

गुरु चांडाल योग से पीड़ित व्यक्ति रोजाना हल्दी और केसर का तिलक लगाएं। इससे गुरु मजबूत होते हैं और इस योग का नकारात्मक प्रभाव आपके जीवन पर कम होता है। अपने बड़ों का सम्मान करें। नियमित रूप से भगवान गणेश और माँ सरस्वती की पूजा करें। गायत्री मंत्र का हल्दी की माला से 108 बार जप करें। भगवान शिव पर दूध अर्पित करें।

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