नवरात्रि छठा दिन: जानें माँ कात्यायनी की महिमा और सही पूजन विधि की जानकारी

नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी को है समर्पित

आज नवरात्रि का छठा दिन है और इस दिन माँ कात्यायनी की पूजा का विधान बताया गया है। माँ कात्यायनी को माँ दुर्गा का ज्वलंत स्वरूप माना गया है। कहते हैं जो कोई भी भक्त माँ कात्यायनी की विधिवत पूजा करता है उसे अपने जीवन में शक्ति, सफलता, प्रसिद्धि का वरदान प्राप्त होता है। देवी कात्यायनी के बारे में प्रसिद्ध मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि, देवी ने ही देवताओं की असुरों से रक्षा की थी।

नवरात्रि विशेष अपने इस ब्लॉग के माध्यम से जानते हैं माँ कात्यायनी की पूजा का महत्व, माँ कात्यायनी की पूजा से मिलने वाले फल की संपूर्ण जानकारी, और साथ ही जानते हैं कि आज की पूजा में किन मंत्रों को शामिल करना शुभ साबित हो सकता है और साथ ही इस दिन क्या कुछ उपाय किए जा सकते हैं।

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माँ कात्यायनी का स्वरूप

माँ कात्यायनी का स्वरूप बेहद ही चमकीला है। माँ की चार भुजाएं हैं। माता कात्यायनी ने दाहिनी तरफ के ऊपर वाले हाथ को अभय मुद्रा में लिया हुआ है और नीचे वाला हाथ वरद मुद्रा में है। बाई तरफ का ऊपर वाले हाथ में माँ ने तलवार धारण की हुई है और नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। माँ कात्यायनी का वाहन शेर है।

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

अर्थात: हे माँ! सर्वत्र विराजमान और शक्ति -रूपिणी प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ।

चैत्र नवरात्रि के छठे दिन बन रहे हैं शुभ योग

सौभाग्य योग: सुबह 09:32 बजे तक, फिर शोभन योग

रवि योग: सुबह 06:05 से रात 10:42 बजे तक

भाग्यशाली समय: सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक

यह तीनों ही योग बेहद ही शुभ और विशेष फलदाई बताये गए हैं। नवरात्रि के छठे दिन इनका बनना इस दिन के महत्व को कई गुना बढ़ा देगा।

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माँ का पसंदीदा भोग और रंग

नवरात्रि में रंगों और भोग का विशेष महत्व बताया गया है। कहते हैं यदि नवरात्रि के 9 दिन के अनुरूप व्यक्ति रंगों का इस्तेमाल करें और देवी के विभिन्न रूपों को उनका मन पसंदीदा भोग अर्पित करें तो इससे व्यक्ति की समस्त मनोकामनाएं जल्द पूर्ण होती है और साथ ही देवी भी शीघ्र और अवश्य प्रसन्न होती हैं। तो आइये जान लेते हैं माँ कात्यायनी का पसंदीदा रंग क्या है और इनका पसंदीदा भोग क्या है।

रंग की बात करें तो माँ कात्यायनी को लाल रंग बेहद ही प्रिय है।

इसके बाद माँ के प्रिय भोग के बारे में मान्यता है कि, माँ कात्यायनी शहद के भोग से बेहद ही शीघ्र प्रसन्न होती है। ऐसे में आप नवरात्रि के छठे दिन की पूजा में माँ कात्यायनी को शहद का भोग अवश्य अर्पित करें।

माँ कात्यायनी की सही पूजन विधि

इस दिन भी जल्दी उठकर स्नान करें और मुमकिन हो तो लाल या फिर पीले रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर गंगाजल से छिड़काव कर के शुद्धिकरण करें। माँ कात्यायनी की प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं।इसके बाद हाथों में फूल लेकर माँको प्रणाम करें और उनका ध्यान करें। इस दिन की पूजा में पीले फूल, कच्ची हल्दी की गांठ, और शहद माँको अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में धूप और दीपक से माँकी विधिवत आरती उतारें। आरती के बाद पूजा में शामिल सभी लोगों को प्रसाद अवश्य वितरित करें और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें।

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माँ कात्यायनी की पूजा का महत्व

वामन पुराण के अनुसार राक्षस महिषासुर का वध करने के लिए क्रोध से और देवताओं की ऊर्जा किरणों से ऋषि कात्यायन के आश्रम में संयुक्त रोशनी को देवी का रूप दिया गया। कात्यायन की पुत्री के रूप में देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। कहते हैं माँ कात्यायनी की पूजा करने से अविवाहित लड़कियों को मनचाहा पति मिलता है।

माँ कात्यायनी का संबंध बृहस्पति ग्रह से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में जिन व्यक्तियों की कुंडली में गुरु ग्रह बृहस्पति ग्रह अशुभ स्थिति में मौजूद हो या पीड़ित अवस्था में हों उन्हें विशेष तौर पर माँ कात्यायनी की पूजा करने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से आप कुंडली में मौजूद इस ग्रह को मजबूत कर सकते हैं।

इसके अलावा माँ कात्यायनी की विधिवत पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से रोग, दुख, संताप और किसी भी प्रकार का भय भी दूर होता है।

नवरात्रि के दिन कन्या पूजन का रहस्य 

आपने आजतक कन्या पूजन अष्टमी या नवमी तिथि को किया जाता है ऐसा सुना होगा और इसी का अनुसरण भी करते होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि के छठे दिन से भी कन्या पूजन का रहस्य जुड़ा है? नहीं? तो आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बताएँगे कि, नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर कन्या पूजन का क्या महत्व होता है।

कहते हैं नवरात्रि का व्रत बिना कन्या पूजन के अधूरा माना गया है। ऐसे में आप अपनी यथाशक्ति के अनुसार नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन अवश्य करायें। इससे माँ प्रसन्न होती हैं। मान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि यदि नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर कन्या पूजन किया जाये तो इससे माँ बेहद ही शीघ्र प्रसन्न होकर जातक के जीवन पर हमेशा अपना आशीर्वाद बनाये रखती हैं।

दरअसल बहुत से लोगों को शायद यह न पता हो लेकिन नवरात्रि की षष्ठी तिथि से ही कन्या पूजन शुरू कर दिया जाता है। इसके बाद लोग अपने सामर्थ्य और मान्यता अनुसार सप्तमी, अष्टमी या नवमी तिथि को कन्या पूजन संपन्न करते हैं। मान्यता है कि कन्या पूजन से माँ भगवती अत्यंत प्रसन्न होती हैं और भक्ति की सभी अभीष्ट मनोकामना की भी पूर्ति करती हैं।

नवरात्रि पर राशि अनुसार इन मंत्रों का जप रहेगा शुभ फलदायी

मेष राशि: ‘ॐ ह्रीं उमा देव्यै नम:’ या ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:’ या फिर ‘ॐ महायोगायै नम:’ मंत्रों का जप आपके लिए सुख-सौभाग्य लेकर आएगा।

वृषभ राशि: ‘ॐ क्रां क्रीं क्रूं कालिका देव्यै नम:’ या ‘ॐ कारक्यै नम:’ मंत्रों का जप आपके लिए समृद्धि और भाग्य लेकर आएगा।

मिथुन राशि: ‘ॐ दुं दुर्गायै नम:’ या फिर ‘ॐ घोराये नम:’ मंत्रों का जप आपके लिए विशेष फलदाई रहेगा।

कर्क राशि: ‘ॐ ललिता देव्यै नम:’ या ‘ॐ हस्त्नीयै नम:’ मंत्रों का जप आपकी सभी मनोकामना की पूर्ति कराएगा। 

सिंह राशि: ‘ॐ ऐं महासरस्वती देव्यै नम:’ या फिर ‘ॐ त्रिपुरांतकायै नम:’ मंत्रों का जप आपके लिए सुख-सौभाग्य और समृद्धि लेकर आएगा।

कन्या राशि: ‘ॐ शूल धारिणी देव्यै नम:’ या ‘ॐ विश्वरुपायै नम:’ मंत्रों का जप आपके लिए शुभ रहेगा। ऐसे  में इस दिन की पूजा में इसे अवश्य ही शामिल करें।

तुला राशि: ‘ॐ ह्रीं महालक्ष्म्यै नम:’ या ‘ॐ रोद्रवेतायै नम:’ मंत्रों का जप आपके लिए सुख-सौभाग्य लेकर आएगा।

वृश्चिक राशि: ‘ॐ शक्तिरूपायै नम:’ या ‘ॐ क्लीं कामाख्यै नम:’ मंत्रों का जप आपके लिए माँ का आशीर्वाद और सुख समृद्धि प्रदान करने वाला साबित होगा।

धनु राशि: ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ या फिर ‘ॐ गजाननाय नम:’ मंत्रों का जप आपके लिए सुख-सौभाग्य और जीवन के हर मोर्चे पर सफलता लेकर आएगा।

मकर राशि: ‘ॐ पां पार्वती देव्यै नम:’ या ‘ॐ सिंहमुख्यै नम:’ मंत्रों का जप आपके लिए सुख-सौभाग्य लेकर आएगा।

कुंभ राशि: इस दिन की पूजा में ‘ॐ पां पार्वती देव्यै नम:’ मंत्र का जप आपको देवी की प्रसन्नता और सुख समृद्धि हासिल कराने वाला साबित होगा।

मीन राशि: ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं दुर्गा देव्यै नम:’ मंत्र का जप आपके लिए विशेष फलदायी रहेगा। इस दिन की पूजा में इस मन्त्र को अवश्य ही शामिल करें।

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