बुध मेष राशि में वक्री: पूरे विश्व पर पड़ेगा इसका प्रभाव!

बुध मेष राशि में वक्री: एस्ट्रोसेज हमेशा की तरह एक ख़ास ज्योतिषीय घटना पर आधारित विशेष ब्लॉग लेकर आया है। इस ब्लॉग में हम बुध के मेष राशि में वक्री होने से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों के बारे में जानेंगे। 21 अप्रैल, 2023 को बुध महाराज मंगल के स्वामित्व वाली मेष राशि में वक्री होने जा रहे हैं। इस लेख के माध्यम से हम पूरे विश्व पर पड़ने वाले वक्री बुध के प्रभावों के बारे में चर्चा करेंगे।

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ज्योतिष शास्त्र में बुध का प्रभाव

सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह बुध है जिसका वातावरण कई तरह की गैसों से मिलकर बना है। सौरमंडल के सबसे छोटे ग्रह का प्रभाव हमारे जीवन पर बहुत अधिक पड़ता है क्योंकि ज्योतिष शास्त्र में इसका प्रभाव और महत्व उतना ही बड़ा माना जाता है। बुध को देवताओं का दूत भी माना गया है जो कि बुद्धि के कारक ग्रह हैं और यह स्वभाव से काफ़ी शांत ग्रह हैं।

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अगर बुध की महादशा के बारे में बात करें तो इसकी कुल अवधि 17 साल की होती है। बुध के शुभ प्रभाव से आप अच्छे गायक बनने में सफल होते हैं। साथ ही, ऐसे जातक बुद्धिजीवी होते हैं। जिन जातकों की कुंडली के लग्न भाव में बुध महाराज मौजूद होते हैं, वह तेज़ दिमाग के होते हैं। इसके अलावा ऐसे जातक सामाजिक, पारिवारिक और प्रेम संबंध के मामले में भाग्यशाली रहते हैं। 

जिन जातकों की कुंडली में बुध कमज़ोर स्थिति में मौजूद होते हैं, उन्हें प्रेम संबंध और पारिवारिक मामलों में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा ऐसे जातकों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। दूसरे पहलुओं के बारे में बात करें तो आपको कमज़ोर बुध के कारण संवाद कौशल में परेशानी, स्किन एलर्जी और कान से संबंधित बीमारियां होने का खतरा अधिक हो सकता है। दूसरे ग्रहों से बुध के संबंध पर दृष्टि डालें तो सूर्य और बृहस्पति इनके प्रति तटस्थ हैं। वहीं शुक्र और शनि से बुध की मित्रता है और चंद्रमा और मंगल को बुध का शत्रु माना जाता है। चंद्रमा से बुध की शत्रुता का अहम कारण है इन दोनों ग्रहों की प्रवृत्ति, दरअसल चंद्रमा को मासूम स्वभाव वाला माना जाता है लेकिन दूसरी ओर बुध कैलकुलेटिव प्रवृति के हैं। 

बुध की प्रवृत्ति को आसान शब्दों में कहें तो यह हर एक स्थिति की छानबीन करने में विश्वास करते हैं और कई बार इसका परिणाम प्रतिकूल भी होता है। उत्तर दिशा के स्वामी बुध प्रवृत्ति से पुरुष माने जाते हैं और इनकी उच्च राशि कन्या और नीच राशि मीन है। अगर इनके वर्ण के बारे में जानें तो इन्हें हरे रंग में दर्शाया जाता है और रत्नों में पन्ना बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है।

बुध मेष राशि में वक्री: तिथि और समय

बुध को एक राशि से दूसरी राशि में जाने में 28 दिनों का समय लगता है। 21 अप्रैल, 2023 को दोपहर 1 बजकर 25 मिनट पर बुध मेष राशि में वक्री हो जाएंगे। आइए अब मेष राशि समेत विश्व पर पड़ने वाले वक्री बुध के प्रभावों के बारे में जानते हैं। इसके बाद, हम कुछ आसान ज्योतिषीय उपायों से भी आपको अवगत कराएंगे जिनकी मदद से आप वक्री बुध के नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकते हैं।

ज्योतिष की दृष्टि से वक्री बुध का महत्व

किसी ग्रह का वक्री होना दरअसल एक भ्रामक स्थिति है जिसमें ग्रह पीछे की ओर जाता हुआ प्रतीत होता है। बुध सूर्य के सबसे करीब हैं और सबसे तेज़ गति से चलने वाला ग्रह है इसलिए इसे सूर्य का एक चक्कर लगाने में कुल 88 दिनों का समय लगता है। वहीं, इसकी वक्री अवस्था की बात करें तो ऐसा साल में 3-4 बार होता है और 3 सप्ताह तक यह दशा चलती है।

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मेष राशि में बुध की मौजूदगी का प्रभाव

मेष राशि में बुध के होने से एक बात तो साफ हो जाती है कि जातकों के जीवन पर मंगल के भी प्रभाव देखने को मिलते हैं। जिन जातकों की कुंडली में मेष राशि में बुध मौजूद होते हैं, ऐसे जातक काफ़ी मज़बूत व्यक्तित्व वाले और विद्वान किस्म के होते हैं। इसके अलावा, यह गायकी और नृत्य में अधिक रुचि लेते हैं, साथ ही यह खाने के शौकीन होते हैं। दूसरे पहलू के बारे में बात करें तो बुध के मेष राशि में होने के परिणामस्वरूप यह जातक अधिक काल्पनिक बातें करते हैं और खूब पैसे खर्च करते हैं और यौन सुख का आनंद उठाते हैं। लेकिन अगर जन्म कुंडली में बुध पीड़ित अवस्था में मौजूद हों तो इसके फलस्वरूप जातक लोन और कारावास का सामना भी कर सकते हैं। स्वभाव पर इसके प्रभाव के बारे में कहें तो ऐसे जातक चंचल मन के होते हैं लेकिन दृढ़ संकल्प वाले होते हैं।

बुध मेष राशि में वक्री: विश्व पर इसके प्रभाव

भारत समेत पूरी दुनिया में बिज़नेस के क्षेत्र में गिरावट आ सकती है।भारत से विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में कमी आने के आसार हैं और वीजा बनाने की प्रक्रिया में भी देरी देखने को मिल सकती है।अध्यात्म में रुचि लेने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी होने की संभावना है।संकेत हैं कि भारत अपनी इंटेलिजेंस का भरपूर इस्तेमाल करने में असफल रहे और इसका प्रभाव कुछ क्षेत्रों पर पड़ सकता है।सरकार के बड़े नेता किसी तरह की विवादास्पद टिप्पणी करके विवादों में घिर सकते हैं।भारत में कुछ विदेशी ताकतें परेशानियां पैदा करने की कोशिश कर सकती हैं, लेकिन भारत को इसका जवाब पूरी सावधानी और योजना के तहत देना चाहिए क्योंकि यह अवधि ज्यादा अनुकूल न रहने के आसार हैं।एक्सपोर्ट का कार्य करने वाले जातकों को अपने बिज़नेस में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा आपको विदेशी स्रोतों से पैसे मिलने में भी विलंब होने की आशंका है।पूरी दुनिया में सट्टे के कारोबार से जुड़े लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इन्हें सावधान रहने की सलाह दी जाती है।भारत समेत विदेशों में भी आर्टिस्ट, पेंटर, म्यूजिक डायरेक्टर आदि को कुछ बाधाओं और काम में विलंब का सामना करना पड़ सकता है।संकेत हैं कि विदेशों में भारत में बने म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट की बिक्री में गिरावट आ सकती है। मांग कम होने के कारण ऐसा होने का अंदेशा है हालांकि यह अस्थायी है।भारत और विश्व में रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े बिज़नेस में गिरावट आने के प्रबल योग हैं।

बुध मेष राशि में वक्री: आसान ज्योतिषीय उपाय

बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करें और उन्हें दूर्वा अर्पित करें।घर और दफ्तर में बुध यंत्र रखें और उसकी पूजा करें।रोज़ाना 108 बार “ऊँ बुधाय नम:” का जाप करें।महीने में एक बार बुधवार के दिन बुध ग्रह के लिए हवन करें।चिड़ियों को भीगे हुए चने खिलाएं।

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