बृहस्पति मेष राशि में वक्री: जानें सभी राशियों पर इसका अच्छे व बुरे प्रभाव व उपाय!

वैदिक ज्योतिष में सभी नवग्रहों का विशेष महत्व होता है। ग्रहों का मनुष्य के जीवन में व्यापक प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक ग्रह अपने समय के अनुसार भिन्न-भिन्न अवस्थाओं में राशि में परिवर्तन करते हैं। कभी यह मार्गी होते हैं, कभी अस्त व उदय तो कभी वक्री अवस्था में रहते हैं। इसी क्रम में बृहस्पति मेष राशि में वक्री होने जा रहे हैं। कोई भी ग्रह जब अपनी सामान्य दिशा की बजाए उल्टी दिशा यानी विपरीत दिशा में चलता हुआ प्रतीत होता है तो ऐसे ग्रह की इस गति को वक्री कहा जाता है। बृहस्पति की वक्री अवस्था विशेष रूप से वह खगोलीय घटना है जब सौर मंडल में ग्रह आगे की ओर न बढ़कर पीछे की ओर बढ़ता हुआ प्रतीत होता है। बृहस्पति प्रतिवर्ष दो से तीन बार वक्री होते हैं और इनका वक्री अवस्था में आना वैदिक ज्योतिष में काफी महत्व रखता है। यह जब भी वक्री होते हैं तो भिन्न-भिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव छोड़ते हैं। 

तो आइए आगे बढ़ते हैं और एस्ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग में विस्तारपूर्वक जानते हैं कि बृहस्पति मेष राशि में वक्री का सभी 12 राशि के जातकों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है और इसके अशुभ प्रभावों से बचने के क्या उपाय हैं। 

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बृहस्पति मेष राशि में वक्री: तिथि और समय

सुख, सौभाग्य, यश, वैभव, धन और बुद्धि के कारक ग्रह बृहस्पति 04 सितंबर 2023 की शाम 4 बजकर 58 मिनट पर मेष राशि में वक्री होंगे। इसके बाद बृहस्‍पति इस साल के अंत में 31 दिसंबर को मार्गी हो जाएंगे। बृहस्पति के वक्री अवस्था का प्रभाव सभी 12 राशियों पर सकारात्मक व नकारात्मक रूप से पड़ेगा जो कि कुंडली में बृहस्‍पति की स्थिति पर निर्भर करेगा। 

ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह का महत्व

वैदिक ज्योतिष में गुरु यानी बृहस्पति को एक शुभ ग्रह माना गया है जो कि जातकों को करियर और धन संबंधी मामलों में लाभ प्रदान करते हैं। बृहस्पति धनु और मीन राशि के स्वामी हैं और कर्क इनकी उच्च राशि है जबकि मकर इनकी नीच राशि मानी जाती है। ये ज्ञान, शिक्षक, संतान, बड़े भाई, शिक्षा, धार्मिक कार्य, पवित्र स्थल, धन, दान, पुण्य और वृद्धि आदि के कारक हैं। नक्षत्रों की बात करें तो ज्योतिष में बृहस्पति को पुनर्वसु, विशाखा, और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामित्व प्राप्त है।

ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह दूसरे, पांचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिस व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति ग्रह मजबूत स्थिति में मौजूद होते हैं उन्हें जीवन में अपार सफलता प्राप्त होती है। हालांकि, इस दौरान जातक के मोटे होने की संभावना अधिक होती है। इनके आशीर्वाद से व्यक्ति को पेट से संबंधित रोगों से छुटकारा मिलता है। वहीं यदि कुंडली में बृहस्पति की स्थिति कमज़ोर हो तो जातक को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। गुरु की कमज़ोर स्थिति के कारण संतान को कष्ट, विवाह में रुकावट आदि समस्याएं पैदा होने लगती है।

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मेष राशि में बृहस्पति का प्रभाव

मेष राशि में बृहस्पति के प्रभाव से व्यक्ति के अंदर नेतृत्व करने का गुण होता है और अपने इस गुण के कारण दूसरों को भी प्रेरित करते हैं। इन जातकों की बात पर कोई असहमत हो जाए तो इनको बहुत जल्द बुरा लग जाता है। ये स्वभाव में बेहद शांत और दूसरों के साथ जल्दी दोस्ती करने वाले होते हैं। ये लोग ज्ञानी और हर चीज़ के बारे में जानने को लेकर उत्सुक होते हैं। ये सकारात्‍मक विचारों वाले होते हैं और अपनी पिछली विफलताओं के बारे में सोचकर परेशान नहीं होते हैं बल्कि आगे क्या अच्छा कर सकते हैं इस बारे में चिंतन करते हैं। मेष राशि पर बृहस्पति की कृपा से जातकों को कई नए अवसर प्राप्त होते हैं। 

बैंकिंग के क्षेत्र से जुड़े लोग अच्छा प्रदर्शन करते हैं और यदि आपका खुद का बिज़नेस हैं तो बहुत उन्नति प्राप्त करते हैं। इनका झुकाव आध्यात्मिक गतिविधियों की तरफ अधिक होता है। नकारात्मक पक्ष की बात करें तो मेष राशि में बृहस्पति के प्रभाव से जातक निर्णय लेने में जल्दबाजी कर सकते हैं और परिणामों के बारे में नहीं सोचते हैं। अपने निर्णय के साथ ही आगे बढ़ते हैं लेकिन कई बार इन जातकों द्वारा लिए गए फैसले गलत सिद्ध हो सकते हैं और इसके हानिकारक परिणाम मिल सकते हैं। ऐसे में, आपको सलाह दी जाती है कि अपने अति-आत्मविश्वास को अपनी बुद्धि और विवेक पर हावी न होने दें।

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बृहस्पति ग्रह के कमज़ोर होने के संकेत

बृहस्पति को ज्ञान का कारक माना जाता है। ऐसे में, गुरु की कमज़ोर स्थिति के परिणामस्वरूप छात्र की पढ़ाई में किसी न किसी तरह की अड़चन आ सकती है और शिक्षा में कई तरह के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।गुरु को धन लाभ का कारक भी माना जाता है और इसके चलते यदि व्यक्ति का भाग्य साथ नहीं दे रहा है और धन हानि का सामना करना पड़ रहा है तो समझ लें कि कुंडली में गुरु कमज़ोर स्थिति में विराजमान है।बृहस्पति को विवाह का कारक भी माना जाता है। ऐसे में, यदि किसी व्यक्ति की शादी में देरी हो रही है या फिर वैवाहिक जीवन में तालमेल की कमी है या फिर विवाह को लेकर अन्य समस्याएं पैदा हो रही हैं तो यह गुरु दोष के कारण हो सकता है।इसके अलावा, यदि आप अपने से अपने बड़ों और बुजुर्गों का सम्मान नहीं करते हैं। संस्कारहीन और चरित्रहीन हैं, तो यह गुरु दोष के कारण हो सकता है।बृहस्पति की कमज़ोर स्थिति स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। यदि व्यक्ति स्मृति हानि, लीवर, किडनी, प्लीहा, सांस, फेफड़ों और पेट की समस्या से ग्रस्त है तो यह भी कुंडली में गुरु के प्रतिकूल होने के संकेत है।कमज़ोर बृहस्पति के कारण व्यक्ति बालों के झड़ने या बालों के झड़ने की नियमित समस्या से परेशान हो सकता है।

बृहस्पति ग्रह के मजबूत होने के कुछ संकेत

जिनका गुरु प्रबल व कुंडली में अनुकूल स्थिति में मौजूद होते हैं उनकी आंखों में चमक और चेहरे पर तेज़ होता है। बृहस्पति ग्रह के मजबूत स्थिति के परिणामस्वरूप जातक बुद्धिमान होता है और उसके पास ज्ञान का भंडार होता है। ये जातक अपने ज्ञान के बल पर दुनिया को झुकाने की ताकत रखने वाले होते हैं। साथ ही, इनके प्रशंसक और हितैषी बहुत होते हैं। मजबूत गुरु के फलस्वरूप जातक का झुकाव आध्यात्मिक गतिविधियों की तरफ अधिक होता है।ऐसे लोग विद्वान होते हैं और समाज में इनकी प्रतिष्ठा दिन-प्रतिदिन बढ़ती है।गुरु के बली होने पर व्यक्ति को भाग्य का भरपूर साथ मिलता है और ऐसे व्यक्ति धन के मामले में बेहद मजबूत होते हैं और जहां भी निवेश करते हैं वहां से अच्छा मुनाफा प्राप्त करते हैं।कुंडली में बृहस्पति के शुभ होने के परिणामस्वरूप व्यक्ति झूठ नहीं बोलता और हमेशा सच का साथ देता है।इसके अलावा, ऐसे जातकों का स्वास्थ्य बेहद अनुकूल रहता है। इन्हें किसी भी प्रकार की कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या परेशान नहीं करती है।

कुंडली में बृहस्पति को मजबूत करने के लिए करें ये आसान उपाय

यदि आपकी कुंडली में बृहस्पति की स्थिति कमज़ोर है तो आप नीचे दिए गए आसान उपायों को अपना सकते हैं:

आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए

बृहस्पति ग्रह को मजबूत करने के लिए जातक को गुरुवार के दिन व्रत करना चाहिए। इस दिन पीले रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए और पानी में हल्दी मिलाकर स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से कुंडली में गुरु मजबूत स्थिति में आते हैं और आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

गुरु कृपा प्राप्त करने के लिए

कुंडली में गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए प्रत्येक गुरुवार को भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें और पूजा के दौरान ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः’ मंत्र का जाप करें। ऐसा करने के गुरु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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विवाह में आ रही रुकावट दूर करने के लिए 

यदि आपके विवाह में देरी व रुकावट आ रही है तो गुरुवार के दिन व्रत रखना चाहिए और इस दिन भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा अर्चना करनी चाहिए। साथ ही किसी ज्योतिष के सलाह से पुखराज धारण करना चाहिए।

पढ़ाई में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए

यदि आपका पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है या मेहनत करने के बाद भी अच्छे परिणामों की प्राप्ति नहीं हो रही है तो गुरुवार के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को धन, वस्त्र और अन्न का दान अवश्य करें। ऐसा करने से शिक्षा में आ रही समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

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बृहस्पति मेष राशि में वक्री: सभी 12 राशियों पर प्रभाव

मेष राशि

गुरु के लग्‍न में वक्री होने पर आपको उलझन महसूस हो सकती है। आपको अपने ही निर्णयों पर शंका होने की भी संभावना है। आप अपनी सेहत पर ध्‍यान देना शुरू करेंगे… (विस्तार से पढ़ें)

वृषभ राशि

गुरु ग्रह का आपके लग्‍न के स्‍वामी शुक्र के साथ शत्रुता का संबंध है और गुरु आपके बारहवें भाव में वक्री हो रहे हैं इसलिए…(विस्तार से पढ़ें)

मिथुन राशि

बृहस्पति मेष राशि में वक्री आपके ग्‍यारहवें भाव में होंगे। यह समय साझेदारी में व्‍यापार कर रहे जातकों के लिए बहुत मुश्किल भरा साबित हो सकता है। इस समय निवेश…(विस्तार से पढ़ें)

कर्क राशि

बृहस्पति मेष राशि में वक्री आपके दसवें भाव में हो रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप आपके पेशेवर जीवन में बदलाव आने की संभावना है। यदि आप नौकरी बदलने…(विस्तार से पढ़ें)

सिंह राशि

बृहस्पति मेष राशि में वक्री आपके पिता, गुरु, प्रशिक्षक या धर्म के भाव यानी नौवें भाव में होंगे। इसके परिणामस्वरूप आपके पिता…(विस्तार से पढ़ें)

कन्या राशि

बृहस्पति मेष राशि में वक्री आपके आठवें भाव में होंगे और ऐसे में, यह अवधि आपके लिए शुभ प्रतीत नहीं हो रही है। आपको अपने निजी जीवन…(विस्तार से पढ़ें)

तुला राशि

बृहस्पति मेष राशि में वक्री आपके सातवें भाव में हो रहे हैं। तुला राशि के लोगों के वैवाहिक जीवन में अत्यधिक मतभेद और अनबन होने की आशंका है। जिन लोगों का तलाक का मामला चल रहा है…(विस्तार से पढ़ें)

वृश्चिक राशि

बृहस्पति मेष राशि में वक्री आपके छठे भाव में होंगे। वृश्चिक राशि के जातकों के लिए बृहस्‍पति का वक्री होना जीवन में कई समस्‍याएं, झगड़े और मतभेद पैदा कर सकता है…(विस्तार से पढ़ें)

धनु राशि

बृहस्‍पति के मेष राशि में वक्री होने पर आपको अपनी सेहत पर ध्‍यान देना होगा। लापरवाही की वजह से वजन बढ़ने, फैटी लीवर, मधुमेह या हार्मोन संबंधी विकार होने का खतरा है। अपनी मां की सेहत को लेकर…(विस्तार से पढ़ें)

मकर राशि

बृहस्पति मेष राशि में वक्री आपके चौथे भाव में वक्री हो रहे हैं। इस दौरान आपके घर पर आपके छोटे भाई या बहन या विदेश से या किसी दूर स्‍थान से किसी रिश्‍तेदार के आने की उम्‍मीद है। अगर आपका…(विस्तार से पढ़ें)

कुंभ राशि

बृहस्पति मेष राशि में वक्री आपके तीसरे भाव में वक्री हो रहे हैं। आपके लिए बृहस्‍पति एक ऐसा ग्रह है जो आपकी आर्थिक स्‍थिति को नियंत्रित करता है। इसके परिणामस्वरूप…(विस्तार से पढ़ें)

मीन राशि

बृहस्पति मेष राशि में वक्री आपके दूसरे भाव में होंगे। लग्‍न भाव में गुरु के वक्री होने से आपकी सेहत को नुकसान पहुंचने की संभावना है। इस मामले में लापरवाही…(विस्तार से पढ़ें)

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इसी आशा के साथ कि आपको यह ब्लॉग भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

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