शास्त्रों के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ
1. आवश्यक तैयारी और नियम
शुद्धता: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
आसन: लाल रंग के ऊनी या कुश के आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठें।
पुस्तक स्थापना: गीता प्रेस या किसी अन्य प्रमाणित प्रकाशन की दुर्गा सप्तशती पुस्तक को साफ लाल कपड़े पर या चौकी पर रखें। पुस्तक को सीधे जमीन पर न रखें।
दीपक: सामने शुद्ध घी या तेल का दीपक और धूप जलाएं।
2. पूजन एवं पाठ का क्रम (त्र्यांगम / नवांगम विधि)
दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करने से पहले निम्नलिखित अंगों का पाठ करना अनिवार्य माना जाता है:
पवित्रीकरण एवं आचमन: जल से आचमन और शरीर/स्थान का पवित्रीकरण करें। [
संकल्प: हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर अपनी मनोकामना बोलते हुए संकल्प लें।
गणेश वंदना व माता का ध्यान: श्री गणेश और मां दुर्गा का ध्यान करें।
शापोद्धार व उत्कीलन: मंत्रों का शापोद्धार और उत्कीलन करें।
त्र्यांगम / मुख्य पाठ के अंग:
देवई कवच
अर्गला स्तोत्र
कीलक स्तोत्र
नवार्ण मंत्र का जप (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै)
3. सप्तशती पाठ की विधियां
आप अपनी सुविधा के अनुसार पाठ कर सकते हैं:
एक दिवसीय विधि: एक ही दिन में पूरे 13 अध्यायों का संपूर्ण पाठ करना।
सप्ताह परायण विधि (7 दिन का क्रम): प्रभु शरणम् के अनुसार:
दिन 1: प्रथम अध्याय
दिन 2: द्वितीय एवं तृतीय अध्याय
दिन 3: चतुर्थ अध्याय
दिन 4: पंचम, षष्ठ, सप्तम एवं अष्टम अध्याय
दिन 5: नवम एवं दशम अध्याय
दिन 6: एकादश (11) अध्याय
दिन 7: द्वादश एवं त्रयोदश (12-13) अध्याय
4. पाठ की समाप्ति और समापन
पाठ पूरा होने के बाद सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें।
तीनों रहस्य (प्राधानिक, वैकृतिक, मूर्ति रहस्य) पढ़ें।
माता की आरती करें।
अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए माता रानी से क्षमा याचना करें और पाठ समर्पित करें। • बहुत तेज चिल्लाकर न पढ़ें: माँ दुर्गा के मंत्र बहुत शक्तिशाली होते हैं, इसलिए उन्हें चिल्लाकर या अत्यधिक ऊंची आवाज में नहीं पढ़ना चाहिए।
आवश्यक सामग्री
- हवन कुंड: तांबे या मिट्टी का हवन कुंड।
- ईंधन व समिधा: आम की सूखी लकड़ियां और गाय के गोबर के उपले।
- मुख्य द्रव्य: शुद्ध गाय का घी, हवन सामग्री, काला तिल, जौ, शहद, गूगल, और कपूर।
- विशेष सामग्री: पान, जायफल, किशमिश, आंवला, केला, खीर, और सूखा नारियल (गोला)।
1. मुख्य हवन सामग्री (मिश्रण बनाने के लिए)
- तैयार हवन सामग्री: 1 या 2 पैकेट (बुरादा/काष्ठ औषधि युक्त)
- काला तिल: 250 ग्राम (शुद्ध और साफ)
- जौ (यव): 250 ग्राम
- शुद्ध गाय का घी: 500 ग्राम या 1 किलो (आहुति और दीप के लिए)
- बूरा या शक्कर: 100 ग्राम
- सूखा नारियल (गोला): 2 या 3 पीस (टुकड़े करने और पूर्णाहुति के लिए)
2. सुगंधित एवं विशेष औषधियां
- गूगल: 50 ग्राम (सकारात्मक ऊर्जा के लिए)
- लोबान: 250 ग्राम
- कमलगट्टा: 21 या 51 पीस (लक्ष्मी प्राप्ति के लिए)
- जायफल और जावित्री: 5-5 पीस
- भोजपत्र: 2-3 शीट
- लाल चंदन का चूरा: 50 ग्राम
- सफेद चंदन: 1 टुकड़ा या पाउडर
3. अग्नि प्रज्वलित करने के लिए
- आम की सूखी लकड़ियां (समिधा): 2 से 3 किलो
- कपूर (भीमसेनी): 50 ग्राम
- गाय के गोबर के उपले (कंडे): 5 से 10 पीस
- माचिस: 1 बॉक्स
4. पूजा एवं पूर्णाहुति सामग्री
- पान के पत्ते: 5 से 7 पीस (डंडी वाले और साफ)
- लौंग और छोटी इलायची: 10-10 ग्राम
- सुपारी: 11 पीस
- मौली (कलावा/रंगसूत्र): 1 रोल
- रोली/कुमकुम और अक्षत (बिना टूटे चावल): 50 ग्राम
- पंचमेवा: 100 ग्राम (काजू, बादाम, किशमिश, मखाना, छुआरा)
- मिश्री या बताशे: भोग के लिए
- लाल कपड़ा: 1 मीटर (चौकी पर बिछाने के लिए)
5. फल, फूल और नैवेद्य (ताजी सामग्री)
- ताजे फल: केला, सेब या मौसमी फल
- नींबू और अनार: (अध्याय अनुसार आहुति के लिए)
- ताजे फूल और माला: मुख्य रूप से लाल फूल (गुड़हल या गुलाब) और गेंदे के फूल
- खीर और पूड़ी: (ग्यारहवें अध्याय की आहुति और भोग के लिए ताजी बनी हुई)
- गंगाजल और शुद्ध जल: आचमन और शुद्धि के लिए
हवन की तैयारी एवं विधि
- स्थानऔरशुद्धि:
- हवन का स्थान साफ-सुथरा रखें। संभव हो तो पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठें।
- स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- अग्निस्थापना:
- हवन कुंड में कपूर और आम की लकड़ियों की सहायता से अग्नि प्रज्वलित करें।
- ‘ॐ आग्नेय नमः स्वाहा’ मंत्र से अग्नि देव की पूजा करें।
- मुख्यआहुतियां(कर्मानुसार):
- गणेश जी की आहुति: गणेश मंत्र के साथ 9 आहुतियां दें। गणेश जी के लिए: ॐ गं गणपतये स्वाहा।
- नवग्रह और अन्य देवी–देवताओं की आहुति: 1-1 आहुति दें। नवग्रहों के लिए: ॐ नवग्रहेभ्यो नमः स्वाहा।
- गुरु देव के लिए: ॐ गुरुभ्यो नमः स्वाहा।
- अग्नि देव के लिए: ॐ अग्नये स्वाहा। इदं अग्नये इदं न मम।
2. महा–मंत्र: नवार्ण मंत्र (सबसे महत्वपूर्ण)
- दुर्गा सप्तशती हवन का सबसे मुख्य और शक्तिशाली मंत्र नवार्ण मंत्र है। इस मंत्र से कम से कम 108 बार (एक माला) हवन सामग्री और घी की आहुति देनी चाहिए:
- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा।
3. चरित्र या अध्याय के अनुसार मुख्य मंत्र
यदि आप 13 अध्यायों के अनुसार हवन कर रहे हैं, तो दुर्गा सप्तशती के तीनों चरित्रों (महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती) के इन मुख्य मंत्रों से 11-11 या 21-21 आहुतियां दें:
- प्रथम चरित्र (अध्याय 1 – महाकाली): ॐ महाकाल्यै स्वाहा।
- मध्यम चरित्र (अध्याय 2 से 4 – महालक्ष्मी): ॐ महालक्ष्म्यै स्वाहा।
- उत्तम चरित्र (अध्याय 5 से 13 – महासरस्वती): ॐ महासरस्वत्यै स्वाहा।
- अध्यायों के अनुसार आहुति: यदि आप प्रत्येक अध्याय के अंत में आहुति देना चाहें, तो दुर्गार्चन पद्धति के अनुसार विशेष सामग्रियों (जैसे शहद, खीर, फल, सूखे मेवे) के साथ आहुति अर्पित करें।
| अध्याय | हवन मंत्र (स्वाहा सहित) | विशेष महा–आहुति सामग्री |
| पहला अध्याय | ॐ महाकाल्यै स्वाहा | कमलगट्टा, काली मिर्च, शहद, महुआ और राई |
| दूसरा अध्याय | ॐ महालक्ष्म्यै स्वाहा | जायफल, जावित्री, कद्दू (पेठा), पीली सरसों और राई |
| तीसरा अध्याय | ॐ महालक्ष्म्यै स्वाहा | उड़द की दाल का बड़ा (भल्ला) |
| चौथा अध्याय | ॐ महालक्ष्म्यै स्वाहा | पंचमेवा (काजू, बादाम, किशमिश, मखाना, पिस्ता) और छुआरा |
| पांचवां अध्याय | ॐ महासरस्वत्यै स्वाहा | शक्कर (बूरा) और गन्ने के टुकड़े |
| छठा अध्याय | ॐ धूम्राक्ष्यै स्वाहा | गुड़हल (जासौन) का फूल |
| सातवां अध्याय | ॐ चामुण्डायै स्वाहा | बेल (बिल्वफल), बिल्वपत्र और पालक |
| आठवां अध्याय | ॐ रक्ताक्ष्यै स्वाहा | लाल चंदन का चूरा |
| नौवां अध्याय | ॐ भैरव्यै तारा देव्यै स्वाहा | केला, नागरमोथा, अगर और तगर |
| दसवां अध्याय | ॐ भगवत्यै स्वाहा | बिजोरा नींबू या सामान्य पीला नींबू |
| ग्यारहवां अध्याय | ॐ नारायण्यै स्वाहा | शुद्ध गाय के घी से बनी खीर और पूड़ी |
| बारहवां अध्याय | ॐ राजराजेश्वर्यै स्वाहा | दाड़िम (अनार के दाने या पूरा फल) |
| तेरहवां अध्याय | ॐ दुर्गा देव्यै स्वाहा | श्रीफल (जटा वाला सूखा नारियल या गोला) |
- प्रत्येक अध्याय का पाठ समाप्त होने पर ऊपर दिए गए विशिष्ट मंत्र का उच्चारण करते हुए सामने लिखी सामग्री को मुख्य हवन सामग्री (जौ, तिल, घी, बूरा का मिश्रण) में मिलाकर अग्नि में आहुति दें।
- पूर्णाहुतिऔरविसर्जन:
- अंतिम आहुति खीर और शहद युक्त पान या पूर्णाहुति सामग्री से दें।
- एक सूखे नारियल (गोले) में घी और सामग्री भरकर मौली बांधें तथा ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं… या पूर्णाहुति मंत्र के साथ इसे अग्नि में समर्पित करें।
- अंत में हाथ जोड़कर माता दुर्गा से भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें
