चैत्र नवरात्रि अष्टमी: कर रहे हैं कन्या पूजन तो इन बातों का रखें विशेष ध्यान!

चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन माँ दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। यह माँ का आठवां स्वरूप होता है। माँ दुर्गा के यूं तो सभी स्वरूप बेहद ही शुभ, पूजनीय और महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन देवी भागवत पुराण के अनुसार महादेव के साथ उनकी अर्धांगिनी के रूप में हमेशा महागौरी ही विराजमान रहती हैं। 

ऐसे में कहा जाता है कि चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर माँ के इस स्वरूप की पूजा करने से शुभ चक्र जागृत होता है और व्यक्ति के सभी असंभव कार्य पूरे होने लगते हैं। बहुत से लोग अष्टमी के दिन घरों में कन्या पूजन कराते हैं ।

तो आइए अपने इस विशेष ब्लॉग के माध्यम से जानते हैं चैत्र नवरात्रि के अष्टमी दिन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातें, इस दिन की पूजन विधि, माँ के स्वरूप की जानकारी और साथ ही जानते हैं कि यदि आप अष्टमी तिथि के दिन पूजन करा रहे हैं तो आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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माँ महागौरी का स्वरूप 

बात करें माँ की स्वरूप की तो माँ महागौरी का स्वरूप एकदम श्वेत कहते हैं। माँ महागौरी ने अपनी तपस्या से गौर वर्ण प्राप्त किया था। इसके अलावा जब माँ की उत्पत्ति हुई थी तो माँ की उम्र 8 वर्ष की थी इसीलिए चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन माँ की पूजा का विधान बताया गया है। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर माँ महागौरी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में धन, वैभव, सुख, शांति बनी रहती है। 

इसके अलावा कहा जाता है कि जो लोग नवरात्रि व्रत नहीं रख सकते हैं उन्हें विशेष तौर पर पड़वा और अष्टमी के दिन व्रत रखने से भी नवरात्रि व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।

माता महागौरी उज्जवल, कोमल, श्वेत वर्ण, और सफेद रंग के वस्त्र पहने हुए हैं। माँ को गाने और संगीत से बेहद प्यार है। इसके अलावा माँ वृषभ यानी बैल पर सवारी करती है। माँ का दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है और नीचे वाले हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है। 

माँ महागौरी के हाथ में डमरू है इसीलिए इन्हें शिवा भी कहा जाता है।

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चैत्र नवरात्रि 2023 अष्टमी कब ?

वर्ष 2023 में अष्टमी या महा अष्टमी 29 मार्च, 2023 को है। चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि 28 मार्च 2023 को शाम 7 बजकर 02 मिनट से शुरू हो जाएगी और 29 मार्च, 2023 को रात 9 बजकर 07 मिनट तक रहेगी।

चैत्र नवरात्रि अष्टमी के दिन शोभन योग और रवि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है। बात करें शोभन योग की तो ये 28 मार्च को रात्रि 11:36 से 29 मार्च को 12:13 तक रहने वाला है वही रवि योग 29 मार्च को 8:07 से शुरू होकर 30 मार्च को 6:14 तक रहेगा।

माँ महागौरी जब प्रिय भोग और सही पूजन विधि

चैत्र नवरात्रि के अष्टमी तिथि पर माँ महागौरी को नारियल या फिर नारियल से बनी चीजों का भोग अवश्य लगाएं। भोग लगाने के बाद नारियल को किसी ब्राह्मण को दान दें और इसे प्रसाद रूप में पूजा में शामिल सभी लोगों को अवश्य दें। इसके अलावा जो लोग अष्टमी तिथि के दिन कन्या पूजन करते हैं वो इस दिन माँ को पूरी, सब्जी, हलवे, काले चने, का भोग भी लगाते हैं।

चैत्र नवरात्रि अष्टमी तिथि सही पूजन विधि

चैत्र नवरात्रि की अष्टमी दिन शास्त्रीय विधि से ही माँ की पूजा की जाती है। इस दिन की पूजा प्रारंभ करें। सबसे पहले कलश और भगवान गणेश का ध्यान करें। इसके बाद माँ के मंत्र का जप करें। माँ को लाल चुनरी अर्पित करें। यदि आप अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन कर रहे हैं तो कन्याओं को भी लाल चुनरी अवश्य चढ़ाएं। माँ को सिंदूर, चावल, आदि चढ़ाएं।आप इस दिन की पूजा में माँ दुर्गा का यंत्र भी शामिल कर सकते हैं। सफेद फूल हाथ में लेकर माता का ध्यान करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में आरती कहें और माँ से अपनी सभी मनोकामना अवश्य कहें।

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माँ महागौरी का प्रिय रंग 

चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि की पूजा करते समय गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करें। कहा जाता है क्योंकि गुलाबी रंग प्रेम का प्रतीक होता है ऐसे में जब अष्टमी तिथि पर आप गुलाबी रंग के वस्त्र पहनकर माँ महागौरी की पूजा करते हैं तो इससे परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम बना रहता है।

माता महागौरी का ध्यान मंत्र

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।

महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अष्टमी तिथि पर कर रहे हैं कन्या पूजन तो इन बातों का रखें विशेष ध्यान

बहुत से लोग नवमी तिथि पर कन्या पूजन करते हैं। हालांकि अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है। ऐसे में यदि आप भी चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि के दिन कन्या पूजन करने जा रहे हैं तो कुछ छोटी-छोटी बातें हैं जिनका विशेष रुप से ध्यान रखकर आप इस दिन के महत्व और इस दिन की पूजा से मिलने वाले फल को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

कन्या पूजन में 2 वर्ष से ऊपर और 10 वर्ष तक की कन्याओं को शामिल करें 2 वर्ष की कन्या कुमारी, 3 वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति, 4 वर्ष की कन्या कल्याणी, 5 वर्ष की कन्या रोहिणी, 6 वर्ष की कन्या कालिका, 7 वर्ष की कन्या चंडिका, 8 वर्ष की कन्या शांभवी, 9 वर्ष की कन्या दुर्गा, और 10 वर्ष की कन्या सुभद्रा मानी जाती है कन्या पूजन में शामिल कन्याओं का हाथ पैर स्वयं धुलवाएँ, उनके लिए आसन बिछाकर उस पर उनको बिठाएँइसके बाद स-सम्मान उन्हे हलवा पूरी, काले चने, का भोजन परोसें भोजन के बाद उनके पैर छूकर उन्हें दक्षिणा अवश्य दें

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मेष राशि के जातक चैत्र नवरात्रि की अष्टमी पर माँ दुर्गा कवच का पाठ करें। वृषभ राशि के जातक चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर विवाहित महिलाओं को भोजन कराकर श्रृंगार की वस्तु भेंट करें। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर मिथुन राशि के जातक माँ दुर्गा की विधिवत पूजा करें। कर्क राशि के जातक चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर छोटी कन्याओं की पूजा करें और उन्हें भेंट अवश्य दें। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर सिंह राशि के जातक माँ की पूजा में लाल रंग के फूल अवश्य शामिल करें। कन्या राशि के जातक चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर माँ को श्रृंगार का सामान अवश्य अर्पित करें। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर तुला राशि के जातक इस दिन माँ दुर्गा की पूजा करें। वृश्चिक राशि के जातक चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर धनु राशि के जातक महिलाओं की सेवा करें। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर मकर राशि के जातक अपने घर में हवन अवश्य कराएं। कुंभ राशि के जातक चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार का सामान भेंट करें।मीन राशि के जातक चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर व्रत अवश्य करें और माँ के लिए हवन कराएं।

इसके अलावा अष्टमी तिथि पर शनि का प्रभाव होता है। ऐसे में कहा जाता है कि चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर माँ दुर्गा की पूजा करने से व्यक्ति की कुंडली में मौजूद शनि दोष दूर होता है। यदि सुहागिन महिलाएं अपनी स्वेच्छा से सुहाग का सामान आदि दान करें तो इससे उन्हें अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।

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