Chanakya Niti: सुपात्र को दिए गए दान का फल कभी नष्ट नहीं होता, जानें आचार्य चाणक्य के विचार
Chanakya Niti आचार्य चाणक्य के मुताबिक, अपमानित होकर जीने के बजाय मर जाना अधिक अच्छा है, क्योंकि मृत्यु से तो क्षणभर का ही कष्ट होता है, जबकि अपमानित होने पर व्यक्ति दिन-प्रतिदिन मरता रहता है।
