29 जुलाई को स्वराशि मीन में गुरु वक्री होकर बनाएगा “गुरु पुष्य योग”!

वैदिक शास्त्र में समस्त नवग्रहों के “गुरु” की उपाधि बृहस्पति को प्राप्त होती है। बृहस्पति को एक शुभ ग्रह माना गया है, जो मनुष्यों के साथ-साथ ग्रहों और देवताओं के भी पूजनीय हैं। ये सभी राशियों में से धनु और मीन राशि का स्वामी हैं, जबकि 27 नक्षत्रों में से पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद के स्वामी होते हैं। 

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बृहस्पति होंगे मीन में वक्री

हिन्दू पंचांग के अनुसार शनि के बाद गुरु अकेले दूसरे ऐसे ग्रह हैं, जो अपना एक राशि चक्र पूरा करने में ज्यादा समय लेते हैं क्योंकि गुरु का हर गोचर लगभग 13 महीनों में होता है, यानी गुरु को एक राशि से दूसरी राशि में आने में लगभग 13 महीनों का समय लगता है। इसके साथ ही गोचर की तरह ही गुरु के वक्री होने को भी विशेष महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जाता है। बृहस्पति औसतन हर वर्ष में कम से कम एक बार वक्री ज़रूर होते हैं। 

गुरु के वक्री होने से तात्पर्य है कि जब वे अपने परिक्रमण पथ पर चलते हुए आगे की ओर न जाकर पीछे की ओर बढ़ना या चलना शुरू कर देते हैं। वास्तव में वे चल तो आगे की ओर ही रहे होते हैं, परंतु पृथ्वी से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि वो पीछे की ओर बढ़ रहे हैं तो उसे गुरु की वक्री अवस्था माना जाता है। 

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वक्री गुरु का प्रभाव

यूँ तो बृहस्पति को एक शुभ ग्रह माना गया है लेकिन किसी भी व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति का प्रभाव शुभ होगा या अशुभ इसका निर्धारण उस कुंडली में बृहस्पति की स्थिति व उनपर अन्य ग्रहों का प्रभाव देखकर की किया जाता है। आमतौर पर बृहस्पति के गोचर से जहाँ जातकों को उनके कारकतत्वों से संबंधित अनुकूल फल मिलते हैं, तो वहीं अपनी वक्री अवस्था में ये उन्ही फलों को प्राप्त करने में कुछ विलंब कर सकते हैं। इसके अलावा गुरु के स्वराशि में वक्री से मनुष्य जीवन के साथ-साथ देश-दुनिया में भी कई बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। 

राशियों पर कैसा रहेगा वक्री गुरु का प्रभाव? जानने के लिए क्लिक करें: मीन राशि में वक्री गुरु (29 जुलाई, 2022)

कब होगा गुरु मीन में वक्री? 

पंचांग अनुसार गुरु जिन्होंने बीते 13 अप्रैल 2022 को, शनि की कुंभ राशि से निकलकर अपनी स्वराशि मीन में गोचर किया था वो अब मीन में ही वक्री गति आरंभ करेंगे। एस्ट्रोसेज के विशेषज्ञों की मानें तो गुरु देव 29 जुलाई 2022, शुक्रवार को प्रातःकाल 1:33 बजे मीन राशि में वक्री हो जाएंगे। इस दौरान गुरु लगभग चार महीने तक अपनी वक्री अवस्था में ही रहते हुए फिर 24 नवंबर 2022, गुरुवार को सुबह 4:36 पर पुनः मीन राशि में ही मार्गी होंगे। ऐसे में गुरु के मीन में वक्री होने की इस स्थिति के दौरान निश्चित रूप से न केवल राशियों पर, बल्कि देश-दुनिया में भी बहुत से बदलाव आने की संभावना बनेगी। 

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“गुरु पुष्य योग” पर होंगे गुरु वक्री

गुरु पुष्य योग का हमेशा से ही पंचांग व ज्योतिष में विशेष महत्व रहा है। ज्योतिष विशेषज्ञों की मानें तो इस योग से जातक को विशिष्ट और अत्यंत शुभ फल प्राप्त होते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार 28 जुलाई, गुरुवार सुबह 07 बजकर 06 मिनट से पुष्य नक्षत्र का आरंभ होगा और उसकी समाप्ति अगले दिन यानी 29 जुलाई, शुक्रवार की सुबह 09 बजकर 47 मिनट पर होगी। जिस समय गुरु वक्री गति आरंभ करेंगे, तो उस अवधि में पुष्य नक्षत्र रहने से सबसे श्रेष्ठ और दुर्लभ योगों की श्रेणी में आने वाला “गुरु पुष्य योग” का निर्माण होगा। वैदिक शास्त्र में बृहस्पति को पुष्य नक्षत्र का स्वामित्व प्राप्त होता है। ऐसे में इस नक्षत्र का आरंभ गुरुवार के दिन होने से “गुरुवार व पुष्य नक्षत्र” के सुंदर संयोग से इस योग का निर्माण होने वाला है। श्रावण अमावस्या के दिन बन रहा ये गुरुपुष्य योग व्यक्ति को जीवन में धर्म और आर्थिक वृद्धि से जुड़े शुभ फल देने का कार्य करता है। इसके अलावा जिस समय गुरु वक्री गति आरंभ करेंगे, उस अवधि में गुरु पुष्य योग के साथ ही सर्वार्थ सिद्धि नामक शुभ योग भी 28 जुलाई की शाम 05 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 29 जुलाई की शाम 06 बजकर 35 मिनट तक उपस्थित रहेगा। जिसके परिणामस्वरूप इस दिन का महत्व कई गुणा बढ़ जाता है। एस्ट्रोसेज के ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 29 जुलाई की प्रातःकाल गुरु के वक्री होने के दौरान इन सभी दुर्लभ संयोगों का बनना जातकों के लिए शुभ रहेगा। यदि कोई व्यक्ति इस दिन धन प्राप्त से जुड़े कुछ उपाय करता है तो उसे निश्चित ही सफलता मिलने की संभावना भी अधिक रहती है। 

इसके अलावा भी गुरु वक्री होते हुए देश-दुनिया में भी कई बड़े बदलाव लेकर आएगा। आइये डालते हैं इन बदलावों पर अपनी एक नज़र:-

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देश-दुनिया पर वक्री गुरु का प्रभाव 

होगी आध्यात्मिकता की वृद्धि

वक्री गुरु की अवधि के दौरान भारत के लोगों का रुझान धर्म व अध्यात्मितकता की ओर बढ़ने की संभावना रहेगी। साथ ही सरकार की ओर से भी किसी धार्मिक मुद्दे या योजना को लेकर कोई बड़ा बयान सामने आ सकता है।  

राजनीति पर पड़ेगा असर 

गुरु को ज्ञान, भाषण, राजनीति आदि का कारक भी प्राप्त होता है। ऐसे में राजनीति से जुड़े प्रभावों, मंत्रीमंडल में फेरबदल व उच्च अधिकार पद की प्राप्ति के लिए कुंडली में गुरु की भूमिका को विशेषरूप से देखा जाता है। अब 29 जुलाई से गुरु का स्वराशि मीन में वक्री होना, भारत में ही नहीं बल्कि विश्वभर के कई देशों की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आने का कारण बनेगा।

इससे भारत मे भी कई राज्यों की राजनीति में अचानक फेरबदल देखने को मिलेगा। संभावना ये भी है कि वक्री गुरु के प्रभाव से कुछ राजनेता अपना दल बदलते हुए दूसरी पार्टी का हाथ थाम सकते हैं।  

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देश में होगी उपभोग वस्तुओं की कमी 

वक्री गुरु के फलस्वरूप देश के कुछ हिस्सों में अराजकता का माहौल बन सकता है। इसके पीछे का कारण उपभोग्य वस्तुओं की कमी व आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में आई अचानक बढ़ोतरी को देखा जा सकता है। 

इसके अलावा जिस समय गुरु अपनी वक्री गति आरंभ करेंगे, उस समय वो शनि द्वारा दृष्ट होंगे। जिसके चलते खाद्य पदार्थ जैसे नमक, घी, तेल, आदि के भी महंगे होने की आशंका बनेगी। साथ ही रुई, कपास, चाँदी, में भी जोरदार तेजी देखी जाएगी। 

नोट: गुरु का मीन में वक्री करना यूँ तो देशभर में बदलाव लेकर आएगा। परंतु आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा गुरु की इस स्थिति का प्रभाव? ये जानने के इच्छुक जातक हमारे विशेषज्ञ ज्योतिषियों से चैट या कॉल पर व्यक्तिगत रूप से परामर्श लेते हुए, उनके मार्गदर्शन से अपनी कुंडली में गुरु को मजबूत बना सकते हैं।  

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