जानिए कब है पापांकुशा एकादशी व्रत?
हिंदू पंचाग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन पापांकुशा एकादशी व्रत किया जाता है। प्रत्येक एकादशी तिथि भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होती है।
हिंदू पंचाग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन पापांकुशा एकादशी व्रत किया जाता है। प्रत्येक एकादशी तिथि भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होती है।
प्रभु राम और माता सीता ने अपने जीवन में भले ही कई मुश्किलों का सामना किया हो लेकिन उसका असर उन दोनों के प्रेम और विश्वास पर कभी नहीं पड़ा
नवरात्र में मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद दशहरा का उत्सव मनाया जाता है। दशहरा को विजयादशमी या आयुधपूजा के नाम से भी जाना जता है। दशहरा का पर्व हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है।
मंगल को सभी ग्रहों का सेनापति कहा जाता है। मंगल को ऊर्जा, भाई, भूमि, शक्ति, साहस, पराक्रम, शौर्य का कारक ग्रह कहा जाता है। मंगल के राशि परिवर्तन से कुछ राशि वालों को फायदा होगा और कुछ को सावधान रहना होगा।
रावण वेद ज्ञाता था. खासकर सामवेद में वह पारंगत था. इसके अलावा वास्तुशास्त्र, ज्योतिष शास्त्र, संगीत शास्त्र और आयुर्वेद शास्त्र का वह ज्ञानी था. वह कविता और श्लोक भी लिखता था.
सनातन परंपरा में पेड़-पौधों को देवताओं के समान पूजनीय और कृपा बरसाने वाला माना गया है. ऐसे में आज विजयादशमी के दिन जिन पौधों की पूजा से सुख-समृद्धि का वरदान मिलता है, उनके बारे में जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.
दशहरे के कई दिन पहले से ही जगह-जगह राम लीला और भगवान राम की कथाओं का मंचन होता है। जिसे देखने लोग इकट्ठे होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं भारत में एक जगह ऐसी भी है, जहां रावण का पुतला नहीं जलाया जाता।
Dussehra 2022: इस पावन दिन घर के मंदिर में घी की ज्योत जलाएं और हनुमान चालीसा का एक से अधिक बार पाठ अवश्य करें। हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद श्री राम रक्षा स्तोत्रम का पाठ करें।
Dussehra 2022: दशहरे के दिन भगवान श्रीराम और हनुमान जी की आराधना करना चाहिए। हनुमान जी की पूजा करने वाले लोगों पर शनि का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है। हनुमान जी महाराज की कृपा जिन पर बनी होती है। उन पर श्रीराम की कृपा भी होती है।
वैसे तो चाणक्य नीति राजनीतिक कूटनीति के लिए ज्यादा जानी जाती है। लेकिन चाणक्य ने बहुत सी बुनियादी बातों के बारे में बताया है जो आम लोगों के लिए अहमियत रखती हैं। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जीवन में कभी भी इन तीन लोगों की मदद नहीं करनी चाहिए।