Chanakya Niti: कहीं आपके भी ऐसे मित्र तो नहीं
परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम् । वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम् ।। बुरे मित्रों से बच कर रहें अर्थात्- पीठ पीछे काम बिगाड़ने वाले तथा प्रत्यक्ष रूप से प्रिय बोलने वाले ऐसे मित्रों का त्याग करना ही उचित होता है।
