Chinnamasta Jayanti 2023: कब है छिन्नमस्ता जयंती, जानें आखिर क्यों की जाती है उनके कटे हुए सिर की पूजा
हिंदू धर्म में दस महाविद्या में से एक मां छिन्नमस्ता की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है क्योंकि देवी के इस दिव्य स्वरूप की पूजा करने पर साधक की मनोकामना बहुत जल्दी पूरी होती है। मां छिन्नमस्ता को माता काली का ही एक स्वरूप माना गया है। माता के भक्त उन्हें ‘छिन्नमस्ता’ या फिर ‘छिन्नमस्तिका’ के नाम से बुलाते हैं। बहुत से लोग उन्हें ‘प्रचण्ड चण्डिका’ के नाम से भी पूजते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार वैशाख मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि को माता की जयंती मनाई जाती है जो कि इस साल 04 मई 2023 को पड़ेगी। आइए मां छिन्नमस्ता की पूजा विधि और धार्मिक महत्व के बारे में जानते हैं।
मां छिन्नमस्ता की कथा
हिंदू मान्यता के अनुसार एक बाद माता पार्वती अपनी सहयोगी जया और विजया के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान करने के लिए जाती हैं, जहां पर उन्हें समय गुजरने का ध्यान नहीं रहता है। मान्यता है कि बहुत समय बीत जाने के बाद जब माता की सहयोगियों को भूख से तड़पने लगीं तो मांं पार्वती अपराधबोध हुआ और उन्होंने खुद अपना गला काट लिया, जिसके बाद उनके धड़ से तीन अलग-अलग खून की धाराएं निकलीं। जिसे पीने के बाद उनके सहयोगी जया और विजया की भूख शांत हुई। उस दिन के बाद से माता के कटे हुए सिर की पूजा की जाने लगी।
कहां है मां छिन्नमस्ता का धाम
हिंदू धर्म में सभी प्रकार के ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं से बचाने और सुख, संपदा और संतान का सुख दिलाने वाली मां छिन्नमस्ता देवी का पावन धाम झारखंड राज्य में रांची से तकरीबन 80 किमी की दूरी पर रजरप्पा स्थान पर है। तकरीबन 6000 साल से ज्यादा पुराना माता का यह मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। माता का यह मंदिर तंत्र-मंत्र की साधना के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।
मां छिन्नमस्तिका का मंत्र
शक्ति की साधना में मंत्र का बहुत ज्यादा महत्व है। ऐसे में छिन्नमस्ता जयंती के दिन देवी के इस दिव्य स्वरूप की पूजा करते समय उनके महामंत्र का जप जरूर करें। मां छिन्नमस्ता की पूजा का पुण्य फल पाने के लिए आप ‘ॐ हूं ॐ’ अथवा ‘ॐ वैरोचन्ये विद्महे छिन्नमस्तायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्’ मंत्र का जप करके उनसे मनचाहा आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
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(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)
