दींन दयाल विरद सम्भारी | हरहु नाथ मम संकट भारी
दींन दयाल विरद सम्भारी | हरहु नाथ मम संकट भारी ॥दोहा॥श्री गुरु चरन सरोज रज , निज मनु मुकुरु सुधारि ।बरनउँ रघुबर बिमल जसु , जो दायकु फल चारि ॥ ॥ चौपाई ॥जब तें रामु ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाएभुवन चारिदस भूधर भारी । सुकृत मेघ बरषहिं सुख बारी रिधि सिधि संपति…
